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Saturday, 9 February 2019

जनप्रतिनिधियों ने जनता की उम्मीदों का कभी नहीं रखा गया--- एयर वाइस मार्शल ओम प्रकाश ने कहा है

जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से पिछड़ेपन का दंश झेल रहा
बलिया। देश की आजादी में अग्रिम भूमिका निभाने वाला बलिया जनपद पौराणिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के बाद भी इसका उचित विकास न होना काफी सोचनीय और चिन्ता का विषय है। स्वतंत्रता संग्राम से विविध सामाजिक आंदोलनों में अपने सक्रिय योगदान से देश काे एक नई दिशा देना वाला जिला जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण पिछड़ेपन का दंश झेल रहा है। इसको दूर करने के लिए सबको मिलकर काम करना होगा। जनपद को विकास की मुख्य धार में जोड़ने का संकल्प लेकर विवेकानंद फाउंडेशन से जुड़े सैकड़ों लोगों आगे आ रहे हैं, जल्द ही इसका सुखद परिणाम देखने को मिलेगा। उक्त बातें एयर वाइस मार्शल ओमप्रकाश तिवारी ने शहर के एक होटल में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहीं। वायु सेना द्वारा अति विशिष्ट सेवा मेडल व विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित जिले के सुरेमनपुर निवासी श्री तिवारी ने जिले के विकास का खाका खिंचते हुए कहा कि जनपद को विकास के पथ पर लाने के लिए हर संभव प्रयास करना फाउंडेशन का मुख्य लक्ष्य बताया। इसके अलावा गंगा व घाघरा के किनारे बसे गांवों को आर्सेनिक से मुक्ति दिलाने के साथ ही युवाओं के लिए स्पोर्ट्स व शिक्षा का हब बनाने के लिए सेना के रिटायर्ड अधिकारियों व कर्मचारियों को एक मंच पर लाने की बात कही। कहा कि अक्सर यह देखने में आता है कि सरकार की तमाम जनकल्याणकारी योजनाएं रुट लेवल पर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देती हैं इसके लिए भी फाउंडेशन से जुड़े लोगोें द्वारा कार्य किया जाएगा। कहा कि जिले की सांस्कृतिक, सामाजिक, एेतिहासिक व शैक्षिक धरोहर को अक्षुण्ण रखने के साथ-साथ इसकी प्रगति का मार्ग प्रशस्त करना हमारा पहला लक्ष्य है। जनपद के विकास के साथ ही पत्रकारों के सवाल पर श्री तिवारी ने बातों- बातों में राजनीति से भी अपनी विशेष रुचि दर्शाई। कहा कि मैं किसी पार्टी का समर्थक और विरोधी नहीं हूँ, फिर भी अगर कोई पार्टी या राजनैतिक दल केवल विकास के मुद्दे पर मुझे लोकसभा का टिकट देता है तो इससे मुझे कोई परहेज नहीं है। जनपद के विकास का खाका खींचने का प्रयास करने वाले श्री तिवारी ने अबतक की सरकारों की तुलना ने भाजपा की कार्यशैली को संतोषजनक बताया। कहा कि भूतपूर्व सैनिक होने के नाते देश के 30 लाख से अधिक सेना से सेवानिवृत्त जवानों का यह नैतिक कर्तव्य है कि वह अपने रोजमर्रा की दिनचर्या से कुछ समय निकालकर प्राइमरी स्तर के सरकारी स्कूलों में बच्चों के बीच ज्ञान की ज्योति जलाएं। इससे जहां बच्चों में शिक्षा के प्रेरणा जाग्रत होगी, वहीं लाखों रुपये तनख्वाह पाने वाले उन शिक्षकों को भी शर्मिंदगी होगी, जिन्हें सरकार बच्चों की शिक्षा के लिए सैलरी देती है, लेकिन उनका स्कूल पर आगमन और बच्चों को पढ़ाना कम ही होता है। उन्होंने ऐसे शिक्षकों को मानवता की दृष्टि से अपने कार्यकलापों मेंसुधार लाने की अपील की। ----ब्यूरो प्रमुख

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